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केजरीवाल का चुनावी दाव, महिलाओं के लिए मेट्रो-बस यात्रा फ्री

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नई दिल्ली। सीएम केजरीवाल का एलान मेट्रो और बसों में महिलाओं को फ्री यात्रा सुविधा। फ्री सुवुधा देने की योजना शुरू करने पर विचार कर रही दिल्ली सरकार ने दी मंजूरी। दिल्ली सरकार का यह कदम क्या आने वाले विधानसभा चुनावों में उसके लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है? क्या सस्ती बिजली और मुफ्त पानी जैसी स्कीमों की तरह इस स्कीम को भी सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है? ऐसे कई सवाल हैं जिन पर विशेषज्ञों समेत महिलाओं की राय भी अलग-अलग है। एनबीटी ने सोशियो-इकनॉमिक और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के कुछ जानकारों से बात करके इस संभावना की हर पहलू को बारीकी से जानने और समझने की कोशिश की और कुछ महिलाओं से भी इसपर राय ली:

कामकाजी व अन्य महिलाओं को हो सकता है फायदा

जेएनयू के रिटायर्ड प्रफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रो.कमल मित्र चिनॉय का कहना है कि दिल्ली सरकार का यह कदम आने वाले चुनावों में मास्टर स्ट्रोक साबित होगा कि नहीं, यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर है कि इससे महिलाओं को काफी फायदा हो सकता है, क्योंकि मेट्रो या बसों में बड़ी तादाद में कामकाजी व अन्य महिलाएं सफर करती हैं। प्रो.चिनॉय का यह भी मानना है कि सरकार को महिलाओं के लिए सफर को पूरी तरह फ्री बना देने के बजाय उनके लिए यात्रा पर कुछ कंसेशन देने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि जब आप समाज के किसी एक तबके के लिए कोई चीज पूरी तरह फ्री कर दोगे, तो दूसरे तबके के लोग उस पर सवाल उठाएंगे और वो भी अपने लिए उसी तरह की छूट की डिमांड करेंगे। इसके अलावा ऐसे पॉप्युलिस्ट कदम उठाकर के लोगों का भरोसा भी एकदम से नहीं जीता जा सकता। हाल ही में हुए चुनावों के दौरान ऐसे कईं उदाहरण देखने को मिले हैं। इसलिए दिल्ली सरकार को एक बैलेंस्ड एप्रोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

लोगों को रिझाने के लिए ऐसी योजना लाती रहती है सरकार

वहीं जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनैशनल स्टडीज के सेंटर ऑफ कंपेरेटिव पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल थ्योरी की प्रोफेसर निवेदिता मेनन का कहना है कि हर सरकार अपने-अपने तरीके से लोगों को रिझाने के लिए या समाज के कुछ खास तबकों को खास तरह की सहूलियतें देने के लिए ऐसी ही कुछ न कुछ योजनाएं लाती रहती हैं। इसमें किसी को ज्यादा अचरज नहीं होना चाहिए। आम आदमी पार्टी शुरू से ही समाज के वंचित और शोषित तबकों को जरूरी सुविधाएं देने की कोशिश करती रही है।

महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं

निवेदिता मेनन ने आगे कहा कि एजुकेशन, हेल्थ, बिजली, पानी आदि के क्षेत्रों में उन्होंने अच्छा काम किया है और ऐसी कईं योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करके भी दिखाया है। आम आदमी पार्टी की पॉलिसी पर सवाल उठाने वालों को यह भी देखना चाहिए कि वह महज विरोध करने के लिए विरोध कर रहे हैं या वाकई ऐसी योजनाओं से समाज के किसी तबके को लाभ मिल रहा है। दिल्ली में महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करते वक्त खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं। ऐसे में अगर उनके लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सफर फ्री किया जा रहा है, तो उसमें बुराई क्या है? प्रो.मेनन का मानना है कि हेल्थ, एजुकेशन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा तो हर सरकार को पूरी तरह फ्री में देनी चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी है। कम से कम आम आदमी पार्टी इस दिशा में काम तो कर रही है।

इस आइडिया से वोट लेने में सरकार कुछ कामयाब हो सकती

दिल्ली स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर के ट्रांसपोर्ट प्लानिंग विभाग के हेड प्रो.पी.के. सरकार का कहना है कि दुनिया के ज्यादातर देशों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम प्रॉफिट में काम नहीं कर रहा है, क्योंकि कहीं न कहीं इसे सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी माना जाता है। दिल्ली में भी डीटीसी या क्लस्टर स्कीम फायदे में नहीं चल रही है। मेट्रो को भी थोड़ा-बहुत ही फायदा हो रहा है। हमारे देश में इंदौर, बैंगलुरु जैसी एक-दो जगहों पर ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट फायदे में चल रहा है। अगर दिल्ली जैसे शहर में महिलाओं को बसों और मेट्रो में फ्री में सफर करने की सुविधा दी जाएगी, तो जाहिर तौर पर इससे सरकार पर काफी आर्थिक बोझ आएगा, लेकिन इससे गरीब तबके और मिडिल क्लास की महिलाओं को काफी राहत मिलेगी और फिर उनका वोट लेने में सरकार जरूर कुछ कामयाब हो सकती है। साथ ही इससे महिलाओं के बीच पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा।

पी.के. सरकार कहते हैं कि सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में टिकट के अलावा अन्य तरीकों से रेवेन्यू बढ़ाने पर विचार करना चाहिए, ताकि सब्सिडी का ज्यादा बोझ सरकार पर न पड़े। इसके अलावा सरकार को सिस्टम की कपैसिटी भी बढ़ानी पड़ेगी। बसों में सुरक्षा के लिए कैमरे लगाने पड़ेंगे, रिजर्व सीटों और लेडीज कोच की संख्या बढ़ानी पड़ेगी, फ्री ट्रैवल के लिए एक पूरा तकनीकी सिस्टम भी डिवेलप करना पड़ेगा। छोटे स्तर पर प्रयोग के तौर पर यह स्कीम चलाकर देखना चाहिए।

फ्री राइड का तोहफा, दूसरे तबकों पर पड़ सकता है
सीआरआरआई के पूर्व डायरेक्टर और एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डिवेलपमेंट के रोड सेफ्टी विभाग के डायरेक्ट सुरेंद्र मोहन सरीन का कहना है कि यह महज एक लोकलुभावन कदम है और इस घोषणा में किसी तरह की कोई दिशा नजर नहीं आ रही है। सरकार केवल एक तबके का वोट हासिल करने के लिए यह कदम उठाना चाह रही है, लेकिन यह नहीं देख रही कि इससे दूसरे तबकों पर क्या असर पड़ेगा? जाहिर तौर पर अन्य लोग इसका विरोध करेंगे। वैसे भी दिल्ली में काफी समय से बुजुर्गों और छात्रों को मेट्रो और बसों में कंसेशन दिए जाने की मांग उठ रही है। ऐसे में उनको छोड़कर महिलाओं को फ्री राइड का तोहफा देने से समाज के दूसरे वर्ग के लोगों में नाराजगी फैलेगी।

सुरेंद्र मोहन मानते हैं कि चुनाव में सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। टैक्स देने वाले लोगों को लगेगा कि उनसे लिया गया पैसा सरकार एक खास तबके को खुश करने के लिए सब्सिडी में उड़ा रही है, जिससे अन्य क्षेत्रों में विकास पर असर पड़ेगा। इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि इस घोषणा के बाद सरकार को वोट मिलेंगे ही। प्रोफेसर सरीन का मानना है कि फ्री में सुविधाएं बांटने की पॉलिसी ठीक नहीं है। अगर सारा पैसा सब्सिडी में ही चला जाएगा, तो डिवेलपमेंट कैसे होगा। हां, सरकार चाहे तो महिलाओं, बुजुर्गों, छात्रों को कुछ कंसेशन दे सकती है, लेकिन पूरा सफर फ्री कर देना ठीक नहीं है।

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