Home Interview मेरा लक्ष्य सेवाभाव से करता रहूं मरीजों का इलाज: डॉ. सचान

मेरा लक्ष्य सेवाभाव से करता रहूं मरीजों का इलाज: डॉ. सचान

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जब हमारे इलाज से मरीज को फायदा मिलता है और वह खुश होता है तो मरीज से अधिक ख़ुशी का अहसास हमें होता है। इस प्रोफेशन में हमें मरीजों की सेवा करने का मौका हमें आत्मसंतुष्टि का एहसास कराता है। यह कहना है पिताजी स्व. श्री श्यामलाल सचान, माता जी श्रीमती विध्यावती जी के बेटे डॉ. ए.एस सचान का। 2 जुलाई 1943 को जन्मे डॉ. सचान ने स्वयं को चिकित्सा जगत में सफलता के शिखर पर पहुंचाया है। अपने जीवन में प्राप्त सफलताओं में अपनी पत्नी स्व. श्रीमती शशि सचान की भूमिका को अहम मानते हुए डॉ. सचान अपने दोनों बेटों प्रतीक और मयंक को हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढऩे की सीख देते है। पेश है टीबीआई 9 के अजय शर्मा की उनसे हुई बातचीत के खास अंश… 

एजुकेशन कहां से प्राप्त की और करियर की शुरुआत कैसे की?

कानपुर के बरोल गांव में मेरा जन्म हुआ। पिताजी किसान थे। उन्होंने गांव में एक इंटर कॉलेज की स्थापना की, जिसे आज पटेल विधा पीठ इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाता है। यहीं से मेरी हाई स्कूल तक की पढ़ाई हुई, फिर कानपुर में आकर जेएनके इंटर कॉलेज से मंैने इंटर किया। डीऐवी कालेज कानपुर से बीएससी की। इसी दौरान मैंने सीपीएमटी की तैयारी की और 1963 में मेरा चयन हो गया।  जीएसबीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर से मंैने एमबीबीएस की पढ़ाई की। 1975 में मेरी एमडी की पढ़ाई कम्प्लीट करने के बाद कानपुर मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर के रूप में ज्वाइन किया। फिर मार्च 1975 से में आगरा आ गया यहां एसएन मेडिकल कॉलेज में रीडर के तौर पर ज्वॉइन किया।

इस प्रोफेशन को अपनाने की मुख्य वजह क्या रही?

लाइफ में एक घटना ने मुझे इस प्रोफेशन में आगे बडऩे के लिए प्रेरित किया। मेरी एक चचेरी बहन का बेटा बीमार हुआ और बीमारी के दौरान ही उसकी असमय मृत्यु हो गई। उस टाइम में हाई स्कूल में पढ़ रहा था। इस घटना के बाद मेरे मन में विचार आया कि मुझे डॉक्टर बनाना है, ताकि मैं लोगों का अच्छे से इलाज कर सकूं।

सबसे अच्छी बात इस प्रोफेशन में क्या लगती है?

जब हमारे इलाज से मरीज को फायदा मिलता है और वो खुश होता है तो मरीज से अधिक ख़ुशी का अहसास हमें होता है। इस प्रोफेशन में मरीजों की सेवा करने

का मौका हमें आत्मसंतुष्टि का एहसास कराता है।

आपका इस प्रोफेशन में लक्ष्य क्या है?

मेरा सिर्फ एक ही लक्ष्य है लोगों को स्वास्थ लाभ देने में मैं सदैव सेवा-भाव से लगा रहूं। बीमारी से किसी भी व्यक्ति की असमय मौत न हो और उसको समय पर उपचार मिले।

लाइफ में प्राप्त सफलता का श्रेय किसे देंगे?

जब मैं कानपुर में अपनी एमडी की पढ़ाई कर रहा था तब फिजीशियन और सर्जन डॉ. ओपी मित्तल हुआ करते थे, जो कि मेरी नजर में एक आयडियल पर्सन थे। मैं उनसे बेहद प्रभावित था। मैं उनके आज्ञाकारी स्टूडेंट में से एक था। मैं उनके साथ केस असिस्ट करता था। वो भी मुझे पसंद करते थे। अपने बेटे जैसा मानते थे। इस प्रोफेशन में कुछ अच्छा करने के प्रेरणा मुझे उन्हीं से मिली। मैं अपनी सफलताओं का श्रेय में उन्हीं को देना चाहूंगा।

जिन्दगी का कोई खास यादगार लम्हा जो आप शेयर करना चाहें?

ऐसा कोई खास लम्हा वैसे तो कोई नहीं, लेकिन एक लम्हा याद है, जब मैं डॉ. ओपी मित्तल जी के साथ केस असिस्ट किया करता था। तब एक सर्जरी केस में डॉक्टर साहब को मैंने सुझाब दिया कि सर हम सर्जरी के लिए पुरे फैफड़े के बजाय सिर्फ बीमारी से डेमिज पार्ट को निकालें तो ठीक रहेगा। उन्होंने मेरी बात ध्यान से सुनी और और सर्जरी शुरू की, उस दिन मेरी सलाह उनको काम आई और सर्जरी कामयाब रही। उस वक्त मुझे बेहद ख़ुशी का अहसास हुआ।

लाइफ का कोई ऐसा यादगार लम्हा जो आप कभी न भुलाना चाहें?

लाइफ में इश्वर के आशीर्वाद से हर कदम कामयावी मिली। लाइफ का हर दिन एक नया और यादगार अहसास रहा जोकि कभी भुलाया नहीं जा सकता।

आपका फेवरेट टूरिस्ट प्लेस जहां आप जाना पसंद करते हों?

भारत के सभी दार्शनिक स्थल मैं जाना पसंद करता हूँ जो कि मेरे फेवरेट टूरिस्ट प्लेस हैं।

हेल्थ को लेकर लोग कितने जागरूक है, क्या कहेंगे?

लोग सतर्क नहीं हैं लोग अवॉयड करते हैं, जब बीमारी पूरी तरह जकड़ लेती है, तब मरीज डॉक्टर के पास जाता है जो कि गलत है। अगर बीमारी की शुरुआती स्टेज पर मरीज अलर्ट हों तो लाइलाज बीमारी से भी बचा जा सकता है।

हेल्थ सेक्टर में इंडिया को किस स्तर पर पाते हैं?

निकट भविष्य उज्ज्वल दिखता है। आज स्पेशलाइजेशन बड़ा है। लोग जागरूक हो रहे हैं, भारत अन्य देशों के मुकाबले हेल्थ सेक्टर में अब आगे बढ़ता नजर आ रहा है।

आप किस प्रकार के केसेज हेंडल करते है?

मैं चेस्ट डिसीज हेंडल करता हूं, जिनमें टीवी के अलावा फेफड़े से जुड़े सभी प्रकार के रोग आते हैं। 

पेसेंट और डॉक्टर के बीच विश्वसनीयता कम हो रही है आप क्या कहेंगे?

हां, विश्वसनीयता कम हुई है, इसके पीछे प्रोफेशन में हावी होता प्रोफेशनलिज्म हैं। साथ ही डॉक्टर से पेसेंट्स के एस्पेक्टेसन बड़ी हैं यह भी एक कारण है।

जब पेसेंट डॉक्टर के पास जाता है तो डॉक्टर बहुत सारे टेस्ट लिख देते है इसकी क्या वजह है ?

मेडिकल लीगल में टेस्ट रिपोर्ट आज बहुत आवश्यक बिन्दु बन गया है। साथ ही मर्ज को पूरी तरह डाइग्नोस करके उसका इलाज सही दिशा में करने के लिए टेस्ट लिखने के आवश्यकता पड़ती है। 

मरीजों को ठीक होने के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट से हटकर काउंसलिंग और मोटिवेशन कितना कारगर है?

हां, हम मरीज से बातचीत करके काउंसलिंग से सबसे पहले उसको मोटिवेट करते हैं, जोकि इलाज में एक महत्वपूर्ण पहलू है।

पेसेंट्स को क्या मेसेज देना चाहेंगे?

मैं कहूंगा प्रिवेंशन बेटर देन क्योर, अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहें और किसी भी मर्ज की शुरुआती स्तिथि में ही उसके इलाज पर ध्यान दें।

प्रोफेशनल लाइफ का कोई ऐसा मूवमेंट जब आपको निराशा हुई हो?

नहीं, प्रोफेशन में कोई ऐसा मौका नहीं रहा जब मुझे निराशा हुई हो।

हेल्थ पॉलिसी लोगों के लिए कितनी जरूरी हैं?

हेल्थ पालिसी बेहद जरुरी है। लोगों को इसको अपनी प्राथमिक जरूरतों में शामिल करना चाहिए। 

पॉलिटीकल लीडर की बात करें तो किस लीडर से आप खास प्रभावित है?

हां, देश प्रगति की और अग्रसर है, में वैश्विक स्तर पर वर्तमान पीएम नरेन्द्र मोदी जी जिन्होंने देश की ख्याति को आगे बढ़ाया है, जोकि सराहनीय है, मैं उनकी कार्यशैली से खास प्रभावित हूं। 

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