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अब बजट को लेकर भाजपा और कांग्रेस में बढ़ी तकरार

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नई दिल्ली। अब बजट को लेकर भाजपा और कांग्रेस आपस में उलझ गए हैं। बताया जा रहा है कि एक फरवरी को मोदी सरकार पूर्ण बजट पेश करेगी जबकि कांग्रेस का कहना है कि सरकार को पूर्ण बजट की जगह सात दशक की परंपरा का पालन करते हुए अंतरिम बजट ही लाना चाहिए।

  • पूर्ण बजट पेश कर सकती है भाजपा, कांग्रेस चाहती है अंतरिम बजट
  • भाजपा बड़ी-बड़ी घोषणाएं करके जनता को गुमराह करना चाहती है : कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार को सात दशक की परंपरा का पालन करते हुए अंतरिम बजट ही लाना चाहिए। 5 साल के लिए चुनकर आई सरकार 6 पूर्ण बजट नहीं पेश कर सकती। ऐसा हुआ तो संसद के भीतर और बाहर कांग्रेस विरोध करेगी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि भाजपा बड़ी-बड़ी घोषणाएं करके जनता को गुमराह करना चाहती है। बजट के साथ फाइनेंस बिल भी होता है। इसे 75 दिनों में पास करना जरूरी है। बजट के प्रस्ताव संबंधित विभागों की समिति को भेजे जाते हैं। उनकी रिपोर्ट के बाद ही फाइनेंस बिल पास होता है। चुनाव के कारण यह संभव नहीं होगा। आजाद भारत का पहला बजट अंतरिम ही था। तत्कालीन वित्त मंत्री षणमुखम शेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। यह 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक साढ़े सात माह के लिए था। 28 फरवरी 1948 को जब उन्होंने पूर्ण बजट पेश किया तब बताया कि पिछले साल अंतरिम बजट पेश किया गया था। अरुण जेटली 22वें वित्त मंत्री हैं। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, आईके गुजराल और मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भी बजट पेश किया था। मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा 10 बजट पेश किए। उनके बाद पी. चिदंबरम ने 9 और प्रणब मुखर्जी ने 8 बजट पेश किए। सामान्य बजट में सरकार पिछले साल के खर्च और आमदनी का हिसाब देती है। नए साल के खर्चों और टैक्स के जरिए कमाई का अनुमान होता है। जबकि अंतरिम बजट में पिछले साल के खर्च और आमदनी का रिपोर्ट कार्ड होता है। अगले कुछ महीनों के लिए खर्चों का प्रस्ताव भी किया जाता है। आमदनी का प्रस्ताव नहीं होता।

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