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षटतिला एकादशी व्रत करने से दुर्भाग्य, दरिद्रता होगी दूर

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रिलिजन डेस्क। षटतिला एकादशी व्रत 31 जनवरी को है, यह माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। हिन्दू धर्म में तिल का काफी महत्व है और इस बहुत ही पवित्र माना जाता है। अपने नाम के अनुसार ही इस दिन तिल का व्यापक प्रयोग किया जाता है। इस दिन दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है।

  • माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है व्रत
  • षटतिला एकादशी के दिन होता है तिलों का छह प्रकार से उपयोग

षटतिला एकादशी के दिन तिलों का छह प्रकार से उपयोग किया जाता है। इसमें तिल से स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन करना, तिल से तर्पण करना, तिल का भोजन करना और तिलों का दान करना शामिल है, इसलिए इसे षटतिला एकादशी व्रत कहा जाता है। षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। कुछ लोग बैकुण्ठ रूप में भी भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। प्रात:काल स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें पुष्प, धूप आदि अर्पित करें। इस दिन व्रत रखने के बाद रात को भगवान विष्णु की आराधना करें, साथ ही रात्रि में जागरण और हवन करें। इसके बाद द्वादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान के बाद भगवान विष्णु को भोग लगाएं और पंडितों को भोजन कराने के बाद स्वयं अन्न ग्रहण करें। ऐसी मान्यता है कि जो मनुष्य षटतिला एकादशी के दिन व्रत रखता है, उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है। साथ ही भगवान विष्णु उसके द्वारा अज्ञानतावश की गई सारी गलतियों को क्षमा कर देते हैं। षटतिला एकादशी का व्रत करने और तिलादि का दान से दुर्भाग्य, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट दूर होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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