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जन आक्रोश से बचना है तो एक्सीडेन्टल सांसदों को टिकिट देने से परहेज करें पार्टियां

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लोकसभा चुनाव 2019 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे माहौल चुनावी होता जा रहा है, नेता तो नेता जनता भी चुनावी मूड में देखी जा रही है हर ओर चुनावी चर्चा आम बात है। जनता को भी आने वाले चुनाव का बेसब्री से इंतजार है, आखिर यही एक मौका है अपने अधिकारों के प्रयोग करने का और अपनी तागत दिखाने का। सभी राजनीतिक पार्टियों ने भी चुनाव की तैयारी को लेकर कमर कस ली है, गठबंधन और महागठबंधन को लेकर रस्साकसी चल रही है, सभी दल अपनी -अपनी गोटियां सेट करने में जुटे हैं और जनता को लुभाने की नीति में लग गये हैं। यही आ रही फिल्मो में भी फिल्म जगत राजनीति को पर्दे पर उतारकर कैश करने में जुटा है, चुनाव से पहले एक्सीडेन्टल प्राइमिनिस्टर जैसी फिल्में भी जनता के मन में गहरा असर कर रही हैं।

याद रहे बड़ी मुश्किल से 10 वर्षो तक देश ने एक एक्सीडेन्टल प्राइमिनिस्टर को झेला है, अपने वोट का सही उपयोग करें सही हाथों में देश की बागडोर दें। चुनाव से पहले हर एक वादा हर एक कार्य पार्टियों और नेताओं द्वारा जनता को लुभाने के लिए किया जाता है। सभी पार्टियां नये-नये वादे कर रही है परन्तु ये पब्लिक है कि सब जानती है।

आज के युग का युवा राजनिति से खासा प्रभावित है, देश के आने वाले लोकसभा चुनाव 2019 में देश का युवा बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना चाहता है और लेना भी चाहिए क्योकि हमारा दिया हुआ एक एक वोट बहुमुल्य है जो देश काऔर हम सबका भविष्य तय करता है। वोट सोच समझ कर उसी पार्टी को देना चाहिए जो देश के युवाओं के बारे में सोचे जिसका दृष्टिकोण देश के प्रति बिलकुल साफ हो और अंत में जनता यह भी चाहती है कि एक्सीडेन्टल सांसदों को टिकट न मिले क्योंकि जनता की नाराजगी का एक बहुत बडा कारण ये एक्सीडेन्टल सांसद होते है।

चुनावी माहौल में चुनाव आयोग की भूमिका अहम होती है, चुनाव आयोग को संज्ञान लेकर ऐसी राजनैतिक दलों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करनी चाहिए जो लोक लुभावन वादे करके पूरा नही करती है तथा समाज को देश को जातिवाद में विभाजित कर वोट जाति के नाम पर वोट मांगती है। कुछ राजनैतिक पार्टी जो किसी न किसी जाति विशेष की पार्टी बन कर रह गयी हैं ऐसी राजनैतिक पार्टीयों पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए।

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